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डुमरांव की साक्षी ने रचा इतिहास, बिहार स्टेट सीनियर जूडो चैंपियनशिप में लगातार छठी बार जीता गोल्ड

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बिहार के डुमरांव की जूडो खिलाड़ी साक्षी ने अपनी शानदार उपलब्धि से जिले का नाम रोशन किया है। दानापुर में आयोजित बिहार स्टेट सीनियर जूडो चैंपियनशिप में साक्षी ने लगातार छठवीं बार स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनकी इस सफलता के साथ ही ‘खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स’ के लिए भी उनका चयन हो गया है।

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लगातार छठी बार स्वर्ण पदक जीतकर बढ़ाया मान

साक्षी वर्ष 2021 से लगातार जूडो में सक्रिय हैं। इस दौरान उन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई है। बिहार स्टेट सीनियर जूडो चैंपियनशिप में लगातार छठवीं बार गोल्ड मेडल जीतना उनकी मेहनत, लगन और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाता है। अब खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के लिए चयन होने के बाद उनके सामने अपनी प्रतिभा को बड़े मंच पर साबित करने का एक और अवसर है।

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माता-पिता ने मिठाई खिलाकर मनाई खुशी

साक्षी की इस उपलब्धि से उनके परिवार में खुशी का माहौल है। बुधवार दोपहर घर पहुंचने पर उनके पिता संतोष कुमार और मां रेखा प्रसाद ने मिठाई खिलाकर उनकी सफलता का जश्न मनाया।

साक्षी ने अपनी कामयाबी का श्रेय माता-पिता और भाई के निरंतर प्रोत्साहन को दिया। उनका कहना है कि परिवार से मिले सहयोग ने उन्हें अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

गुरु रविशंकर सिंह ने जताया गर्व

साक्षी की सफलता पर उनके गुरु रविशंकर सिंह ने भी गर्व जताया है। उनकी उपलब्धि ने एक बार फिर साबित किया है कि निरंतर अभ्यास, अनुशासन और परिवार के सहयोग से खेल के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी हासिल की जा सकती है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी साक्षी आगे बढ़ रही हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज से बीकॉम कर चुकी हैं और फिलहाल जालंधर में बीपीएड की तैयारी कर रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए गोल्ड जीतने का सपना

साक्षी का सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना और भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। लगातार छठी बार राज्य स्तरीय चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के लिए चयन होने से उनकी इस यात्रा को नई दिशा मिली है।

साक्षी की उपलब्धि उन बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करती हैं। उनकी सफलता डुमरांव के साथ-साथ बिहार के खेल जगत के लिए भी गर्व का विषय है।

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