Patratu news: पतरातू प्रखंड अंतर्गत पीवीयूएनएल के छाई डैम से प्रभावित चार प्रमुख गांवों बलकूदरा, रसदा, गेगदा और जयनगर के विस्थापित ग्रामीणों का आक्रोश आखिरकार फूट पड़ा। रसदा में डहर समानता कंपनी के गेट के पास आयोजित एक अहम बैठक में ग्रामीणों ने प्रबंधन की नीतियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। बलकूदरा मुखिया विजय मुंडा की अध्यक्षता और मुखिया प्रतिनिधि लालू महतो के संचालन में हुई इस बैठक में ग्रामीणों ने छाई डैम में चल रहे ऐश माउंट निर्माण कार्य को अनिश्चितकाल के लिए बंद कराने का एकतरफा फैसला लिया।

पूजा से पहले रोजगार देने का टूटा भरोसा
बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि छह अगस्त को प्रबंधन के साथ हुई वार्ता में तय हुआ था कि चारों गांवों से कम से कम तीस-तीस स्थानीय बेरोजगार युवकों को दुर्गा पूजा से पहले अनिवार्य रूप से रोजगार मुहैया कराया जाएगा। तय सहमति के आधार पर प्रभावित गांवों से युवकों की सूची भी प्रबंधन को सौंप दी गई थी। इसके बावजूद प्रबंधन ने महज औपचारिकता निभाते हुए कुछ युवकों को फोन कर बुलाया और उनका मेडिकल टेस्ट कराकर छोड़ दिया, लेकिन किसी को भी काम पर नहीं रखा।

मुआवजा और प्रदूषण समिति पर भी नहीं हुई पहल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने न केवल रोजगार के मामले में वादाखिलाफी की, बल्कि 15 सितंबर तक धान की फसल का उचित मुआवजा देने का जो आश्वासन दिया था, वह भी अब तक अधूरा है। इसके अलावा राख से फैलने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रदूषण नियंत्रण समिति के गठन की दिशा में भी प्रबंधन की तरफ से कोई गंभीर कदम नहीं उठाया गया। इस टालमटोल के रवैये से विस्थापित परिवारों में भारी रोष व्याप्त है।
समझौता लागू होने तक काम रहेगा पूरी तरह बंद
प्रभावित ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा कि उपायुक्त की अध्यक्षता में संपन्न हुए त्रिपक्षीय समझौते के प्रावधानों का अक्षरशः पालन होना चाहिए। रोजगार, धान मुआवजा और प्रदूषण नियंत्रण जैसे बुनियादी मुद्दों को दरकिनार कर किसी भी सूरत में निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर धरातल पर ठोस कार्रवाई शुरू नहीं होती, तब तक छाई डैम पर ऐश माउंट निर्माण का काम पूरी तरह से ठप रहेगा।


