
नगर: गांधी मैदान में मंगलवार शाम रावण वध समारोह संपन्न होने के बाद घर लौटने की जल्दबाजी में मुख्य निकास द्वार पर अचानक भीड़ का दबाव बढ़ गया। इस दौरान कुछ महिलाएं अनियंत्रित होकर गिर पड़ीं और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। भीड़ के पैरों तले दबने से चार महिलाएं घायल हो गईं। इनमें एक महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि अन्य घायलों को आसपास के अस्पतालों में प्राथमिक उपचार दिलाया गया। अनुमंडल प्रशासन ने भी चार महिलाओं के घायल होने की पुष्टि की है।

मुख्य गेट पर बढ़ा भीड़ का दबाव, लड़खड़ाकर गिरीं महिलाएं
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रावण के पुतलों का दहन समाप्त होते ही हजारों की संख्या में लोग एक साथ मैदान से बाहर निकलने लगे। मुख्य निकास द्वार के पास सड़क की तुलना में मैदान का स्तर नीचे होने के कारण धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।

इसी दौरान आगे चल रही कुछ महिलाएं लड़खड़ाकर गिर पड़ीं और पीछे से आ रही भीड़ का दबाव उन पर बन गया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सड़क पर महिलाओं, पुरुषों और बच्चों की चप्पलें बिखर गईं। कई लोग भीड़ के बीच अपने परिजनों को तलाशते नजर आए।
स्थानीय युवाओं ने संभाला मोर्चा, स्कूटी से अस्पताल पहुंचाए घायल
स्थिति बिगड़ती देख स्थानीय युवाओं ने राहत कार्य शुरू किया। उन्होंने भीड़ में फंसी महिलाओं और बच्चों को बाहर निकालने में मदद की। भारी भीड़ और जाम के कारण एंबुलेंस को घटनास्थल तक पहुंचने में परेशानी हो रही थी।
ऐसे में स्थानीय युवाओं ने घायल महिलाओं को स्कूटी से नजदीकी अस्पतालों तक पहुंचाया। सूचना मिलने पर एसडीओ धनराज कुमार और एसडीपीओ राघव दयाल भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने स्थानीय युवाओं के सहयोग से भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
जाम में फंसी एंबुलेंस, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल
घटना के दौरान बाजार से राम-जानकी का रथ भी गुजर रहा था। इसके चलते गंभीर रूप से घायल महिला को अनुमंडल अस्पताल ले जा रही एंबुलेंस को रास्ते में जाम का सामना करना पड़ा। इस स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों ने आयोजन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आयोजन समिति के कई स्वयंसेवक अपनी निर्धारित जगहों पर मौजूद नहीं थे और मुख्य निकास द्वार पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात नहीं था। लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद आपातकालीन वाहनों के लिए अलग रास्ते और सुरक्षित निकास की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं थी।
प्रशासन ने स्थिति संभाली, बड़े आयोजनों की सुरक्षा पर सवाल
प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय युवाओं की सक्रियता के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया। हालांकि, घटना ने बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, निकास द्वारों की व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की पहुंच को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रावण वध जैसे बड़े आयोजनों में लोगों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। इस घटना के बाद निकास मार्गों पर पर्याप्त सुरक्षा बल, स्वयंसेवकों की तैनाती और एंबुलेंस के लिए निर्बाध रास्ता उपलब्ध कराने जैसे इंतजामों पर ध्यान देने की जरूरत सामने आई है।


