NHRC notice: झारखंड पुलिस के अधिकारियों पर लगे मारपीट, अभद्र भाषा के प्रयोग और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने इस मामले में राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पूरे रिकॉर्ड की दोबारा समीक्षा करने और 28 दिसंबर 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का स्पष्ट निर्देश दिया है। 23 अक्टूबर 2026 को जारी किए गए आधिकारिक पत्र में आयोग ने पुलिस महकमे को आठ सप्ताह की समयसीमा दी है। इस पत्र की प्रतियां राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी और झारखंड राज्य मानवाधिकार आयोग के सचिव को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई हैं।

धुर्वा के तत्कालीन थानेदार पर लगे थे गंभीर आरोप
यह पूरा मामला झारखंड होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव राजीव कुमार तिवारी की ओर से दर्ज कराई गई एक पुरानी शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने 27 मई 2022 को मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया था। आयोग में दर्ज केस संख्या 1588/34/16/2022 के तहत रांची के धुर्वा थाने के तत्कालीन प्रभारी प्रवीण कुमार और अन्य पुलिसकर्मियों पर पद का दुरुपयोग करते हुए शिकायतकर्ता के साथ मारपीट करने और बेहद भद्दी भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए गए थे।

विभागीय जांच में दोषी, मगर कार्रवाई पर उठे सवाल
रांची के पुलिस अधीक्षक ने 13 मई 2025 को आयोग को भेजी गई अपनी रिपोर्ट में पुष्टि की थी कि विभागीय जांच के दौरान पुलिस निरीक्षक प्रवीण कुमार दोषी पाए गए हैं। हालांकि, विभाग द्वारा उनके खिलाफ केवल चेतावनी देते हुए मामूली दंडात्मक कार्रवाई की गई थी। इस हल्की कार्रवाई को लेकर शिकायतकर्ता राजीव कुमार तिवारी ने कड़ा विरोध जताया और आयोग के समक्ष इसे नाकाफी बताया।
वीडियो फुटेज और अहम दस्तावेजों की मांग
शिकायतकर्ता ने 9 मई 2026 को आयोग को दिए अपने प्रत्युत्तर में आरोप लगाया कि पुलिस मामले पर लीपापोती करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि घटना के दिन की वीडियो रिकॉर्डिंग और CCTV फुटेज सार्वजनिक होने से पूरी हकीकत साफ हो जाएगी। तिवारी ने आयोग से विभागीय जांच की पूरी रिपोर्ट और उससे जुड़े सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों की प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की थी। आयोग ने शिकायतकर्ता की आपत्तियों को बेहद गंभीर मानते हुए अब डीजीपी स्तर से पूरे मामले की नए सिरे से समीक्षा रिपोर्ट तलब की है।


