
पटना: बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव (बिहार MLC चुनाव) के लिए प्रचार अभियान आज शाम 5 बजे थम जाएगा। प्रचार के अंतिम दिन प्रत्याशियों ने मतदाताओं तक पहुंचने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में कहीं डोर-टू-डोर कैंपेन चल रहा है, तो कहीं फोन कॉल और वॉइस मैसेज के जरिए मतदाताओं से संपर्क किया जा रहा है। इस बीच पटना स्नातक सीट से जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार की तबीयत बिगड़ने और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के अस्पताल पहुंचने से चुनावी चर्चा और तेज हो गई है।

आठ सीटों पर मुकाबला, एनडीए और महागठबंधन की प्रतिष्ठा दांव पर
इस बार का विधान परिषद चुनाव कई राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। एनडीए की एकजुटता, महागठबंधन के दलों के बीच तालमेल, जन सुराज की सक्रियता और बागी तेवर वाले नेताओं की भूमिका पर सबकी नजर है। प्रचार के अंतिम दिन तक प्रत्याशी अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में लगे हैं। आठ सीटों पर कुल 164 उम्मीदवार मैदान में हैं। कई निर्वाचन क्षेत्रों में एक से अधिक प्रमुख दलों के प्रत्याशी होने के कारण मुकाबला बहुकोणीय हो गया है।

बिहार MLC चुनाव: पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार और अनुज सिंह की चर्चा
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र इस चुनाव की सबसे चर्चित सीटों में शामिल है। जेडीयू ने मौजूदा विधान पार्षद नीरज कुमार को फिर से उम्मीदवार बनाया है। वह लगातार चौथी जीत के लिए मैदान में हैं। उनके सामने जन सुराज के डॉ. अनुज सिंह, राजद के दिलीप कुमार और कांग्रेस के असदुल्लाह खान चुनाव लड़ रहे हैं।
इस सीट पर राजनीतिक चर्चा उस समय और बढ़ गई, जब मोकामा के जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने खुलकर अनुज सिंह का समर्थन करना शुरू कर दिया। अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच राजनीतिक मतभेद पहले भी सामने आते रहे हैं। ऐसे में पार्टी के एक विधायक का दूसरे दल के उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार करना जेडीयू के लिए असहज स्थिति बन गया है।
इसी बीच नीरज कुमार की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें पटना के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात की और उनका हालचाल जाना।
दरभंगा स्नातक सीट पर 40 उम्मीदवारों ने किया नामांकन
दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी मुकाबला बहुकोणीय है। भाजपा ने मौजूदा विधान पार्षद सर्वेश कुमार को उम्मीदवार बनाया है। सर्वेश कुमार ने वर्ष 2020 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की थी और अब भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।
उनके सामने राजद के अनिल कुमार झा, कांग्रेस के राजनिकांत पाठक और जन सुराज के डॉ. मोहम्मद इम्तियाज नूरानी समेत अन्य प्रत्याशी हैं। इस सीट पर 40 उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल करने की जानकारी दी गई है, जिससे मुकाबला और व्यापक हो गया है।
तिरहुत और कोसी स्नातक सीट पर भी मुकाबला
तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में एनडीए की ओर से जेडीयू के अभिषेक झा मैदान में हैं। उनके सामने जन सुराज के विमोहन कुमार और राजद की रश्मि विनायक गौतम समेत अन्य प्रत्याशी हैं।
वहीं, कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा ने मौजूदा विधान पार्षद एनके यादव पर भरोसा जताया है। उनके सामने राजद के नीतेश कुमार, कांग्रेस के मनोज कुमार जायसवाल और जन सुराज के रजनीश रंजन चुनाव लड़ रहे हैं।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में इन मुद्दों पर नजर
चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भी प्रत्याशियों के बीच मुकाबला दिलचस्प है। यहां शिक्षकों से जुड़े मुद्दे चुनाव प्रचार का अहम हिस्सा बने हुए हैं। वेतन, सेवा शर्तें, अनुदानित संस्थानों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- पटना शिक्षक सीट: भाजपा के नवल किशोर यादव के सामने राजद के संजीव कुमार सिंह, कांग्रेस के संजय यादव और जन सुराज की दिव्या ज्योति समेत अन्य प्रत्याशी हैं।
- दरभंगा शिक्षक सीट: कांग्रेस ने मौजूदा विधान पार्षद मदन मोहन झा को फिर उम्मीदवार बनाया है। जन सुराज के एसपी राय भी मैदान में हैं।
- तिरहुत शिक्षक सीट: भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह और जन सुराज के श्याम नंदन यादव समेत अन्य प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।
- सारण शिक्षक सीट: जन सुराज ने मौजूदा विधान पार्षद अफाक अहमद को उम्मीदवार बनाया है, जबकि राजद की ओर से जयराम यादव मैदान में हैं।
जन सुराज की एंट्री से मुकाबला हुआ बहुकोणीय
प्रशांत किशोर की जन सुराज ने सभी आठ सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। इससे कई निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबला बहुकोणीय हो गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी अपने उम्मीदवारों के जरिए कितना समर्थन हासिल कर पाती है।
दूसरी ओर, राजद और कांग्रेस के उम्मीदवारों के अलग-अलग सीटों पर मैदान में होने से विपक्षी मतों के बंटवारे की संभावना पर भी चर्चा हो रही है। एनडीए के सामने भी स्थानीय असंतोष और नेताओं के बीच मतभेदों को संभालने की चुनौती है।
23 अक्टूबर को मतदान, 27 अक्टूबर को मतगणना
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना है, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। प्रचार आज शाम 5 बजे समाप्त हो जाएगा। इसके बाद प्रत्याशी और राजनीतिक दल मतदाताओं से अंतिम संपर्क और अपनी चुनावी रणनीति पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
अब सबकी नजर मतदान और मतगणना पर है। इन चुनावों के नतीजों से पता चलेगा कि विभिन्न दलों की रणनीति, स्थानीय समीकरण और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ का कितना असर पड़ा।


