Giridih news : सिखों के चौथे गुरु श्री गुरु रामदास जी महाराज का पावन प्रकाश पर्व रविवार को गिरिडीह शहर में पूरी श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया। सुबह होते ही स्थानीय रागी जत्थे द्वारा शबद कीर्तन का गायन शुरू किया गया, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में रंग गया। दोपहर होते होते शहर के प्रधान गुरुद्वारा में सिख समुदाय के साथ-साथ अन्य धर्मों के श्रद्धालुओं की भी भारी भीड़ जुटने लगी। इस पावन अवसर पर पिछले 48 घंटों से निरंतर चल रहे श्री अखंड पाठ साहिब का विधिपूर्वक समापन हुआ।

दरबार साहिब की भव्य सजावट, मत्था टेकने पहुंचे लोग


प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा के दरबार साहिब को बेहद मनमोहक और भव्य तरीके से सजाया गया था। मत्था टेकने और गुरु का आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। स्थानीय रागी जत्थे ने मधुर वाणी में कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को निहाल किया। इस दौरान गुरुद्वारा के प्रधान सेवक डॉ गुणवंत सिंह मोंगिया खुद दरबार साहिब में उपस्थित रहकर सेवा कार्य में जुटे नजर आए और व्यवस्था संभाली।
संगत ने ग्रहण किया अटूट लंगर

शबद कीर्तन और अरदास के उपरांत गुरुद्वारा परिसर में विशाल लंगर का आयोजन किया गया। लंगर में भारी संख्या में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने पंगत में बैठकर पूरी श्रद्धा के साथ प्रसाद ग्रहण किया। विभिन्न वर्गों और धर्मों के लोगों की मौजूदगी से सामाजिक सौहार्द और सेवा की सुंदर तस्वीर देखने को मिली।
गुरु रामदास जी के सेवा भाव और त्याग को किया याद

समारोह के दौरान प्रधान सेवक डॉ गुणवंत सिंह मोंगिया ने संगत को संबोधित करते हुए चौथे गुरु के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु रामदास जी महाराज त्याग और सेवा की अद्वितीय प्रतिमूर्ति थे, जिन्होंने अपने शुरुआती जीवन में उबले चने बेचकर सादगी से अपना भरण पोषण किया था। इसके बाद वे अमृतसर पहुंचे और सिख समाज की सेवा करते हुए विश्व प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर की स्थापना की। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में चमकने वाला यह पवित्र स्थल गुरु रामदास जी के निस्वार्थ सेवा भाव और समर्पण का ही प्रत्यक्ष प्रमाण है।


