Cyber Fraud Ranchi: राजधानी रांची के सिलवई बस्ती निवासी अनूप लाल प्रसाद मंडल साइबर अपराधियों के एक नए और शातिर पैंतरे का शिकार हो गए। ठगों ने जीवन प्रमाण पत्र (डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट) बनाने का झांसा देकर उनके बैंक खाते से 3.91 लाख रुपये उड़ा लिए। पीड़ित अनूप लाल ने बताया कि 10 अक्टूबर को उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से फोन आया था। कॉलर ने खुद को अधिकृत प्रतिनिधि बताते हुए पेंशन से जुड़े जीवन प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पूरी कराने की बात कही और बातों-बातों में उनसे निजी व गोपनीय बैंकिंग जानकारियां हासिल कर लीं। इसके बाद 12 अक्टूबर से उनके खाते से लगातार रकम की निकासी शुरू हो गई। बैंक से पैसे कटने के मैसेज आने पर जब तक वे कुछ समझ पाते, तब तक खाते से 3.91 लाख रुपये साफ हो चुके थे। पीड़ित ने इस संबंध में रांची के साइबर क्राइम थाने में औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कराई है।

सीनियर सिटीजन कार्ड के बहाने 20 मिनट में ₹4.11 लाख गायब
साइबर जालसाजी की दूसरी सनसनीखेज वारदात रांची के नगड़ाटोली में सामने आई, जहां बुजुर्ग अन्यस सोरेंग को सीनियर सिटीजन कार्ड बनवाने का झांसा देकर 4.11 लाख रुपये की चपत लगा दी गई। पीड़ित के अनुसार, 28 सितंबर की रात वह अपने मोबाइल पर फेसबुक चला रहे थे, तभी उनकी स्क्रीन पर सीनियर सिटीजन कार्ड बनाने से संबंधित एक आकर्षक विज्ञापन पेज दिखाई दिया। उस पेज पर दिए गए कथित टोल-फ्री नंबर पर जैसे ही उन्होंने संपर्क किया, उन्हें व्हाट्सऐप के जरिए आगे की प्रक्रिया के लिए जोड़ा गया। फोन करने वाले शातिर ने खुद को बैंक ऑफ इंडिया का वरिष्ठ अधिकारी बताया और कार्ड जारी कराने के नाम पर बैंक खाते की पूरी जानकारी के साथ-साथ मोबाइल पर आया OTP भी मांग लिया।

20 मिनट के भीतर चार बार में उड़ाई गई रकम
शातिर साइबर ठगों ने जानकारी और OTP हाथ लगते ही ताबड़तोड़ ट्रांजैक्शन किए। रात 9:02 बजे से लेकर 9:22 बजे के बीच यानी महज 20 मिनट के भीतर चार अलग-अलग किस्तों में बुजुर्ग के खाते से पूरी रकम निकाल ली गई। बुजुर्ग को उस वक्त धोखाधड़ी का अंदेशा नहीं हुआ, लेकिन जब उन्होंने बैंक शाखा जाकर अपनी पासबुक अपडेट कराई, तो खाते से 4.11 लाख रुपये गायब देखकर उनके होश उड़ गए। इसके बाद पीड़ित ने फौरन साइबर थाने का रुख किया और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।
साइबर सेल ने शुरू की तकनीकी जांच
दोनों मामलों को लेकर रांची साइबर क्राइम थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू कर दी है। पुलिस की टीम उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों को ट्रैक करने में जुटी है, जिनके जरिए इन पैसों का ट्रांसफर किया गया है। अधिकारियों ने आम नागरिकों, खासकर बुजुर्गों और पेंशनर्स से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर दिखने वाले किसी भी अनजान लिंक या पेज पर भरोसा न करें और बैंक अधिकारी बनकर आने वाली कॉल्स पर कभी भी अपनी निजी जानकारी या ओटीपी साझा न करें।


